श्वेतपद्म
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Tuesday, January 28, 2020
ये गान बहोत रोये .....
शह्द जिने का मिला करता है थोडा थोडा.....
मेरी आँखो की पुतली मे .....
तु अभी से वाकीफे गम न हो .....
तू प्यार का सागर है .....
रन्जिशही सही दिल ये दुखाने के लिये आ .....
अर्थ नवा गीतास मिळाला....
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